Chapter 1: कंप्यूटर सामान्य परिचय (Computer Basics in Hindi)

सीपीयू की गति को प्रभावित करके वाले कारक:

(i) शब्द परास (Word Length):

शब्द परास बाइनरी अंको (Bit) की वह संख्या है, जो कंप्यूटर एक बार में प्रोसेसिंग के लिए लेता है. शब्द परास अधिक होने से कंप्यूटर की गति बढ़ जाती है. शब्द परास की लम्बाई 8, 16, 32 या 64 बिट (Bit) तक हो सकती है.

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(ii) कंप्यूटर घड़ी (Computer Clock):

कंप्यूटर में एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तन क्लॉक प्लस (Clock Plus) के आने पर होता है जिसे कंप्यूटर घड़ी द्वारा पैदा किया जाता है. कंप्यूटर घड़ी द्वारा क्लॉक प्लस जितनी जल्दी-जल्दी भेजा जाएगा, कंप्यूटर उतना ही तेज कार्य करेगा.  यहाँ आपको बता दें कि इसकी गति को प्रति सेकेण्ड प्लस की संख्या या हर्ट्ज़ (Hz) में मापा जाता है.

(iii) कैश मेमोरी (Cache Memory): 

यह मुख्य मेमोरी से आवश्यक डेटा को लाकर रखता है ताकि जरुरत पड़ने पर तीव्र गति से सीपीयू को दिया जा सके. यह मेमोरी तथा कंप्यूटर की गति के बीच तालमेल स्थापित करने का कार्य करता है. इससे कंप्यूटर की गति (Speed) में वृद्धि होती है.

(iv) समानांतर गणना (Parallel Operation): 

एक साथ कई निर्देशों के क्रियान्वयन से सीपीयू कि क्षमता का बेहतर उपयोग होता है जिससे कंप्यूटर की गति बढ़ाती है.

(v) सीपीयू और अन्य उपकरणों के बीच समन्वय (Integration between CPU and Peripherals): सामान्यतया सीपीयू तीव्र गणना करता है अतः अन्य उपकरणों के धीमा होने से कंप्यूटर की गति प्रभावित होती है.

कंप्यूटर की विशेषताएं

गति (Speed): एक सेकण्ड में लाखों गणनाएँ करने की क्षमता.

स्वचालित (Automatic): कंप्यूटर बहुत सारे कामों को ख़ुद से अंजाम दे सकता है, जैसे गणना कि क्रिया करना, गणना के दौरान मानव हस्तछेप नगण्य.

त्रुटिहीन कार्य (Accuracy): गणना में त्रुटी लगभग नगण्य होती है, होती भी है तो उसका कारण मुख्यतः मानव द्वारा प्रोग्राम या डेटा में गलती हो.

स्थायी भण्डारण क्षमता (Permanent Storage Capicity): सूचनाये इलेक्ट्रनिक तरीके से संगृहीत की जाती है.

विशाल भण्डारण क्षमता (Huge Storage Capicity): कंप्यूटर के विभन्न संगृहित माध्यमों (हार्ड डिस्क, CD रोम इत्यादि) में असीमित डेटा तथा सूचनाओ का संग्रहण किया जा सकता है.

जल्द निर्णय लेने कि क्षमता: कंप्यूटर सूचनाओं का तीव्र विश्लेषण कर त्वरित निर्णय लेना और देना है.

विविधता: कंप्यूटर की सहायता से विभिन्न प्रकार के कार्य संपादित किये जा सकते हैं.

पुनरावृति: कंप्यूटर से एक कार्य को बारबार करवाया जा सकता है.

स्फूर्ति (Agility): एक मशीन होने के कारण कंप्यूटर को कार्य संपादन में थकान या बोरियत जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता.

गोपनीयता (Secrecy): कंप्यूटर में संगृहित सूचनाएँ अगर उपयोगकर्ता चाहे तो पासवर्ड का उपयोग कर गोपनीय रख सकता है.

कार्य की एकरूपता (Uniformality of Work): कार्यों की लगातार पुनरावृति से भी कंप्यूटर की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

कंप्यूटर की सीमाएँ

(i) बुद्धिहीन (No Brain): कंप्यूटर में स्वयं की सोचने और निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती. यह केवल दिए गए निर्देशों के अन्दर ही कार्य कर सकता है.

(ii) खर्चीला (Expensive): कंप्यूटर के हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेर काफ़ी महँगे होते हैं तथा इन्हें समय-समय पर आवश्कतानुसार परिवर्तित भी करना पड़ता है.

(iii) वायरस का खतरा (Immune to Virus): कंप्यूटर में वायरस का खतरा बना रहता है जो सुचना और निर्देशों को दूषित या समाप्त कर सकता है. ये वायरस कंप्यूटर कि भण्डारण क्षमता को भी प्रभावित करते हैं. हालाँकि मार्केट में बहुत सारे एंटी वायरस मौजूद है जिनसे इन परेशानियों से बचा जा सकता है.

(iv) विद्दुत पर निर्भरता (Depends on Electricity): कंप्यूटर अपने कार्य के लिए विद्दुत पर निर्भर रहता है. विद्दुत नहीं रहने पर कोई भी कार्य कंप्यूटर के द्वारा संभव नहीं है.

कंप्यूटर के उपयोग

  1. बैंक में
  2. रेलवे, बस तथा वायुयान के आरक्षण में
  3. वेज्ञानिक अनुसन्धान
  4. शिक्षा
  5. मनोरंजन
  6. संचार में
  7. प्रकाशन में
  8. चिकित्सा विज्ञान में
  9. प्रशासन में
  10. व्यापार में
  11. रक्षा में
  12. मौसम की जानकारी प्राप्त करने में
Chapter 2: कंप्यूटर का विकास (Development of Computer)

इसे भी पढ़ें: A से लेकर Z तक कंप्यूटर के शब्दकोश (Abbreviation of Computer A to Z in Hindi)

Computer Basics in Hindi

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