उच्च शिक्षा के लिए महानगरों में आते स्टूडेंट्स याद रखे यह 5 बाते

    Things you must know while studying in other cities
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    आज सूचना क्रांति के इस दौर में शिक्षा मानव विकास का एक महत्वपूर्ण अंग बन गयी है| जिससे सम्बंधित जानकारी के आभाव में कई बार मानव “विकास” की इस रेस से बाहर हो जाता है| इसलिए आज भारत जैसे देश में लोग अपने भविष्य को सुनहरा बनाने के लिए महानगरों की और आकर्षित हो रहे है| उन्हें अपने मूल क्षेत्र और राज्य से ज्यादा शैक्षिक विकास की संभावनाएं महानगरों में दिखाई देती है| जिसका सीधा और स्पष्ट कारण है, महानगरों में विकल्प का होना| कई बार यही विकल्प स्टूडेंट्स को महानगरों की तरफ आने के लिए मजबूर करते है|

    वर्तमान में हम जो ‘यूथ कल्चर देखते है उसने विकास की पूरी परिकल्पना को ही बदल कर रख दिया है| आज विकास का दायरा काफी बढ़ गया है| विकास केवल  शैक्षिक न होकर कई रूपों में हमारे सामने है जिनमे खासकर Skill Devlopment(स्किल डेवलप्मेंट) , Communication Devlopment(कम्युनिकेशन डेवलप्मेंट),और Personality Devlopment(परसनलिटी डेवलप्मेंट)आदि शामिल है| आज स्टूडेंट्स के लिए यह जरुरी हो गया है कि वह जब किसी कॉलेज या संस्था में जाये तो वह शैक्षिक ज्ञान प्राप्त करने साथ साथ अन्य चीजों के बारे में भी जाने, जिससे उनका व्यक्तित्व और भी कुशल बने|लेकिन महानगरों  में अपना बेहतर कल देखने वाले स्टूडेंट्स को कई बार उचित मार्गदर्शन और सुझाव न मिलने पर उन्हें समस्याओ का सामना करना पड़ता है, इसलिए उनके उज्जवल और बेहतर भविष्य के लिए जरुरी है,उनका इन बातो को जानना|

    (1) पी.जी या हॉस्टल हो हमेशा कॉलेज के पास – 

    आमतौर पर स्टूडेंट्स के साथ यह परेशानियाँ बनी रहती हैं कि उन्हें मिलने वाले पी.जी ज्यादातर कॉलेज या इंस्टिट्यूट से दूर होते है|जिससे उनका ज्यादातर समय कॉलेज आने जाने में निकल जाता है|और वो कई बार तनाव में आकर अपनी पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पाते| इसलिए हर फ्रेशर स्टूडेंट्स के लिए हमारा यही सुझाव है कि वह पी.जी का चयन करते समय यह ध्यान दे कि वह कॉलेज या संस्थान से कम से कम दूरी में हो और आप अपना कीमती समय बचाकर उसे  किसी आवश्यक काम में लगा सके| इसके और भी कई दूसरे फायदे है जैसे पी.जी पास होने से आप लाइब्रेरी का इस्तेमाल देर तक कर सकते है  साथ ही एग्जाम में समय से कॉलेज पहुँच सकते है|  

    (2) सीनियर से करे इंटरेक्ट –

    आमतौर पर कॉलेज जाने वाले हर फ्रेशर के मन में ये बात होती है, कि उनके सीनियर्स  कही उनकी रैगिंग न कर दे इसी डर के कारण वो उनसे मिलने और बात करने में कतराते है लेकिन आप को बता दे कि कॉलेजो में अब  रैगिंग पूरी तरह से बैन है और अगर कोई रैगिंग करता है तो उसके खिलाफ कानूनी सजा का प्रावधान है| इसलिए आप निश्चिन्त होकर अपने सीनियर्स से बात करे और एक बॉन्ड बनाने की कोशिश करे| ताकि आप अपने मन में आई बातो और जिज्ञासाओं को उनसे साझा करे, जिससे आपको अपनी जिज्ञासाओं के लिए उचित मार्गदर्शन मिले| 

    senior interaction
    senior interaction

    क्योकि आमतौर पर इन सभी चीजों को लेकर हमारे मन में एक स्टीरिओटाइप बना होता हैं ,जिसके आधार पर स्टूडेंट्स हर सीनियर को एक ही चश्मे से देखते है ,लेकिन मेरे अनुभव से ऐसा नहीं है| प्रत्येक इंसान अच्छा या बुरा हो सकता है| इसलिए हमें चाहिए कि हम उससे व्यक्तिगत तौर पर जुड़कर उसके बारे में जानने के बाद ही किसी प्रकार की राय बनाएं|

    (3) खानपान और शेडूल का रखे विशेष ख्याल –

    महानगरों में आने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स की परेशानी की अहम् वजह होती है खानपान .. क्योकि अपने व्यस्त शेडूल में से खाना बनाने के लिए स्टूडेंट्स समय नहीं निकाल पाते है| और कई बार कुछ स्टूडेंट्स की यह समस्या होती है| कि वह  खाना पकाना ही नहीं जानते है|इसलिए वह विकल्प के तौर पर खाने के लिए रेस्टोरेंट,ढाबा या स्टाल का सहारा लेते है| जोकि हमेशा उनकी हेल्थ के लिए एक चैलेंज बना रहता है| ऐसे स्टूडेंट्स को चाहिए कि वह समय निकलकर खुद से  खाना बनाए या ऐसे खाने का सेवन करे जो पौष्टिक हो और आपको मानसिक और शारीरिक रूप से तंदरूस्त रखे|

    मानसिक और शारीरिक जरुरत के लिए जितना जरुरी खानपान है उतना ही जरुरी है नियमित शेडूल…. ताकि आप प्रत्येक गतिविधि को आसानी से कर सके| जिसमे समय से उठना, खाना,पढ़ना, सोना इत्यादि शामिल है| क्योकि  नियमित रूप से  स्टूडेंट्स अगर अपने शेडूल को एक समय अंतराल के अंतर्गत  निर्धारित करते है तो उससे उन्हें   दिनचर्या के कार्य करने में आसानी होती है|

    (4) लक्ष्य के प्रति रहे जागरूक –

    सामान्यत: देखा गया है कि स्टूडेंट्स महानगरों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए निश्चित लक्ष्य निर्धारित करकेआते है|लेकिन अपने इस लक्ष्य पर बना रहना कई बार उनके लिए चुनौती बन जाता है,जिसका सीधा कारण होता है महानगरों की चकाचौंध के अनुसार बदलता उनका मन.. जो स्टूडेंट्स को अन्य विकल्पों की ओर आकर्षित करता है|

    लक्ष्य के प्रति रहे जागरूक
    लक्ष्य के प्रति रहे जागरूक

    कई बार वो ज्यादा जानने की चाह में भीं अपने लक्ष्य से भटक जाते है और ऐसे लोगो से संपर्क स्थापित करते है जो उनके रुझान को ही बदल के रख देते है| ऐसे में स्टूडेंट्स के साथ समस्या खड़ी हो जाती है और वही इसका दूसरा और महत्वपूर्ण कारण है शुरुवात में स्टूडेंट्स को पाठ्यक्रम समझने में कठिनाई का होना|जिसके कारण वो तनाव में आकर दूसरे कोर्स में जाने की कोशिश करते है इसलिए उन्हें चाहिए कि वह इन सभी समस्याओ से इतर अपने लक्ष्य में केंद्रित रहे और निरंतर प्रयास करके उस लक्ष्य को पाने की कोशिश करे ताकि आप पर लगाए गए श्रम और संसाधनाओ की पूर्ति हो सके|   

    (5) ध्यानपूर्वक होकर करे company (संगत) का चुनाव

    ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति की संगत से ही उसके व्यक्तिगत व्यवहार का पता चलता है कि वह किस प्रवृति का इंसान है इसी आधार पर हमारे लिए यह अहम् हो जाता है कि हम अपनी कंपनी (संगत) का चुनाव बहुत ध्यानपूर्वक होकर  करे| जिनमे आमतौर पर ऐसे लोग शामिल हो जो जानकार, जागरूक,व्यवहारकुशल और व्यसनमुक्त हो जिनके साथ रहकर हमारी छवि धूमिल होने के बजाए एक बेहतर दिशा तलाश कर सके|

    कई बार क्षणिक सुख पाने के लिए स्टूडेंट्स गलत संगत का चुनाव कर लेते है|जो उन्हें गलत रास्ते की ओर ले जाती है,जिससे निकलना उनके लिए एक प्रश्न बन जाता है और सही मायने में माता पिता द्वारा लगाए गए संसाधन और श्रम सब व्यर्थ चले जाते है इसलिए स्टूडेंट्स को किसी भी संगत company का चुनाव करते समय याद रखना चाहिए कि उनकी संगत ऐसे हो जो उन्हें एक बेहतर दिशा दिखा सके| 

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